अब 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी अनिवार्य पीएफ का लाभ
51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आएंगे
नई दिल्ली, 16 सितम्बर। केंद्र सरकार ने नौकरीपेशा लोगों की सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की अनिवार्य वेतन सीमा 15 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रतिमाह करने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकार का अनुमान है कि इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आ जाएंगे।
आसान भाषा में समझें तो क्या बदला
अभी तक 15 हजार रुपये मासिक से अधिक वेतन पर नई नौकरी शुरू करने वाला कर्मचारी स्वतः अनिवार्य ईपीएफ व्यवस्था के दायरे में नहीं आता था। नई सीमा लागू होने के बाद 25 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन पाने वाले नए कर्मचारी अनिवार्य रूप से इसके दायरे में आ सकेंगे। इससे खास तौर पर 15 हजार से 25 हजार रुपये मासिक वेतन वाले लाखों कर्मचारियों को फायदा होगा।
ईपीएफओ के दायरे में आने पर कर्मचारियों को केवल भविष्य निधि यानी पीएफ की बचत का ही लाभ नहीं मिलता, बल्कि कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) के तहत बीमा सुरक्षा भी मिलती है। इस तरह नई वेतन सीमा कर्मचारियों की वर्तमान बचत के साथ सेवानिवृत्ति और परिवार की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत करेगी।
12 साल बाद बदली वेतन सीमा
ईपीएफओ की वेतन सीमा इससे पहले सितम्बर 2014 में बढ़ाई गई थी। उस समय इसे बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रतिमाह किया गया था। इसके बाद लगभग 12 वर्षों में वेतन और आय के स्तर में काफी बदलाव आया है। कई राज्यों और व्यवसायों में न्यूनतम मजदूरी भी पुरानी सीमा के आसपास पहुंच गई है। इसी को देखते हुए सरकार ने अब इसे 25 हजार रुपये करने का निर्णय लिया है।
सरकार का कहना है कि इससे अधिक कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा। कर्मचारियों को नौकरी बदलने पर भी पीएफ जैसी सुविधाओं को जारी रखने में मदद मिलेगी। इससे कंपनियों में कर्मचारियों को बनाए रखने और कार्यबल में स्थिरता बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
इस प्रस्ताव पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श किया गया था। व्यय वित्त समिति ने 16 जून 2026 की बैठक में इसकी सिफारिश की थी। वेतन सीमा बढ़ने के कारण सरकार पर भी अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। वर्तमान में लगभग 10,250 करोड़ रुपये के वार्षिक बजटीय सहयोग के मुकाबले सरकारी खर्च बढ़कर करीब 11,339 करोड़ रुपये सालाना होने का अनुमान है। अगले पांच वर्षों में लगभग 56,696 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया है।
करीब आठ करोड़ कर्मचारी ईपीएफओ से जुड़े
ईपीएफओ देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। यह कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी पेंशन योजना और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना का संचालन करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठानों के करीब 7.98 करोड़ कर्मचारी ईपीएफओ में योगदान कर रहे हैं। कर्मचारी पेंशन योजना से करीब 82 लाख पेंशनभोगियों को पेंशन मिल रही है।
नई वेतन सीमा से सामाजिक सुरक्षा का दायरा और बढ़ेगा। खास तौर पर उन कर्मचारियों को इसका लाभ मिलेगा जो अब तक 15 हजार रुपये की सीमा पार होने के कारण अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर रह सकते थे।
मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और ईपीएफओ अब इस निर्णय को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करेंगे।
