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चेस्टनट और ओक में मिला अल्जाइमर से मुकाबले का नया सुराग

Ferroptosis, an iron-dependent cell death, plays a crucial role in the pathology of Alzheimer’s disease (AD). Several characteristics of AD, including excessive iron accumulation, elevated lipid peroxide and reactive oxygen species (ROS) levels, and decreased glutathione peroxidase 4 (GPX4) levels, align with the features of ferroptosis. While traditional methods of inhibiting ferroptosis have centered on chelating Fe and trapping radicals, therapeutic strategies that modulate the GPX4 axis to mitigate ferroptosis in AD are yet to be explored.

 

टैनिक एसिड पर भारतीय वैज्ञानिकों का अध्ययन, मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान से बचाने की संभावना

 

–ज्योति रावत –

वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर रोग से मुकाबले की दिशा में एक महत्वपूर्ण संभावना खोजी है। चेस्टनट और ओक जैसे पेड़ों में प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला टैनिक एसिड मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली एक विशेष प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज से भविष्य में अल्जाइमर के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम लागत वाली उपचार रणनीति विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

अल्जाइमर मस्तिष्क को धीरे-धीरे प्रभावित करने वाला रोग है। इससे याददाश्त, सोचने-समझने और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता कमजोर होती जाती है। दशकों के शोध के बावजूद इसकी जटिल प्रक्रिया को अभी पूरी तरह समझा नहीं जा सका है और इसका पूर्ण उपचार उपलब्ध नहीं है।

वैज्ञानिकों का ध्यान अब ‘फेरोप्टोसिस’ नाम की कोशिका-मृत्यु प्रक्रिया पर गया है। इसमें शरीर में मौजूद लौह और ऑक्सीडेटिव तनाव की भूमिका होती है। अल्जाइमर से प्रभावित मस्तिष्क में असामान्य रूप से लौह का जमाव, हानिकारक ऑक्सीडेटिव अणुओं की वृद्धि और कोशिकाओं की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली में कमी जैसे परिवर्तन देखे जाते हैं। इनमें से कई लक्षण फेरोप्टोसिस से भी जुड़े हैं।

इस प्रक्रिया में जीपीएक्स4 नामक एक एंजाइम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसे सरल शब्दों में कोशिकाओं की सुरक्षा करने वाली एक ढाल समझा जा सकता है। यह कोशिकाओं की झिल्ली में हानिकारक ऑक्सीकरण को नियंत्रित कर उन्हें क्षतिग्रस्त होने से बचाता है। जीपीएक्स4 की गतिविधि कमजोर होने पर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर) के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक पॉलीफेनॉल का अध्ययन करते हुए पाया कि टैनिक एसिड जीपीएक्स4 की मात्रा और उसकी गतिविधि बढ़ाने में मदद कर सकता है। टैनिक एसिड कई वनस्पतियों, विशेषकर चेस्टनट और ओक में पाया जाने वाला प्राकृतिक पॉलीफेनॉल है।

शोध में वैज्ञानिकों ने विभिन्न प्राकृतिक पॉलीफेनॉल की जांच की। इनमें टैनिक एसिड ने कई स्तरों पर उत्साहजनक क्षमता दिखाई। इसमें लौह से जुड़ी हानिकारक प्रतिक्रियाओं और ऑक्सीडेटिव तनाव को नियंत्रित करने के साथ फेरोप्टोसिस को रोकने की क्षमता भी सामने आई।

अध्ययन के अनुसार टैनिक एसिड का महत्व केवल फेरोप्टोसिस तक सीमित नहीं है। यह अल्जाइमर से जुड़े एमाइलॉयड और टाउ प्रोटीन के असामान्य जमाव को रोकने, ऑक्सीडेटिव तनाव घटाने और कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र माइटोकॉन्ड्रिया की कार्यक्षमता बचाने में भी उपयोगी हो सकता है। इस तरह वैज्ञानिकों को एक ही प्राकृतिक पदार्थ में कई स्तरों पर काम करने की संभावना दिखाई दी है।

अब तक फेरोप्टोसिस को रोकने के प्रयास मुख्य रूप से अतिरिक्त लौह को नियंत्रित करने और हानिकारक ऑक्सीडेटिव अणुओं का प्रभाव कम करने पर केंद्रित रहे हैं। नए अध्ययन में जीपीएक्स4 को सीधे सक्रिय करने और उसकी मात्रा बढ़ाने की संभावना सामने आई है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह अल्जाइमर और फेरोप्टोसिस के बीच संबंध को समझने तथा भविष्य की दवाएं विकसित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

यह अध्ययन ‘केमिकल साइंसेज’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके आधार पर दवा रसायन विशेषज्ञ टैनिक एसिड जैसे प्राकृतिक यौगिकों से अधिक प्रभावी नए अणु विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

हालांकि इस खोज को अल्जाइमर का उपचार मानना अभी जल्दबाजी होगी। यह मुख्य रूप से बीमारी की जैविक प्रक्रिया को समझने और संभावित उपचार विकसित करने की दिशा में एक शोध उपलब्धि है। आगे व्यापक प्रयोगों और परीक्षणों से यह निर्धारित होगा कि टैनिक एसिड पर आधारित यह रणनीति मनुष्यों में कितनी सुरक्षित और प्रभावी हो सकती है।

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