शिक्षा/साहित्य

गढ़वाल विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण शुरू

 

गढ़वाल विश्वविद्यालय और मानव रचना संस्थान के संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम में 96 प्रतिभागी शामिल

श्रीनगर गढ़वाल, 27 अक्टूबर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र और मानव रचना अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एवं अध्ययन संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 96 शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के प्रावधानों और उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन से परिचित कराना है।

उद्घाटन सत्र में गढ़वाल विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक प्रो. देवेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति उच्च शिक्षा को बहुविषयक, कौशल आधारित, विद्यार्थी केंद्रित और रोजगारोन्मुख बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। शिक्षकों की शैक्षणिक दक्षता बढ़ाकर ही इसके उद्देश्यों को कक्षाओं तक पहुंचाया जा सकता है।

मानव रचना संस्थान के कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव ने बहुविषयक शिक्षा और नवीन शिक्षण पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया। प्रो. प्रियंका सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। डॉ. सोमेश थपलियाल ने प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन संबंधी जानकारी दी।

प्रथम तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली के प्रो. कुमार सुरेश ने कहा कि सामान्य शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण को अलग-अलग रखने से कौशल शिक्षा को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाया। नई शिक्षा नीति इन दोनों के बीच समन्वय स्थापित कर विद्यार्थियों को व्यावहारिक दक्षता, रोजगारपरक कौशल और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने पर बल देती है।

दूसरे सत्र में प्रो. संदीप कुलश्रेष्ठ ने विभिन्न पीढ़ियों के बीच संवाद को ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा और भारतीय भाषाएं लोकज्ञान, परंपराओं तथा जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

उन्होंने कहा कि पलायन, एकल परिवारों और डिजिटल माध्यमों पर बढ़ती निर्भरता से पीढ़ियों के बीच प्रत्यक्ष संवाद घट रहा है। वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों तथा युवाओं के तकनीकी ज्ञान का परस्पर आदान-प्रदान समाज के लिए उपयोगी हो सकता है।

उद्घाटन सत्र में प्रो. नंदिनी श्रीवास्तव, डॉ. अमरजीत सिंह परिहार और अन्य शिक्षाविद उपस्थित रहे। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. संजय कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रशिक्षण में भारतीय ज्ञान परंपरा, भाषाई विविधता और कौशल शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया।

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