न्यूक्लियर मेडिसिन और स्वास्थ्य: आधुनिक चिकित्सा का नया चमत्कार
Nuclear medicine uses small amounts of radioactive materials for the diagnosis and treatment of disease and other medical conditions. While tests like X-rays show the structures inside the body, nuclear medicine scans can produce images that show how your organs work.

-By- Aditya Singh Rawat
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में न्यूक्लियर मेडिसिन (नाभिकीय चिकित्सा) एक अत्यंत महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी तकनीक बनकर उभरी है। इसका उपयोग विभिन्न गंभीर बीमारियों, विशेषकर कैंसर, हृदय रोग और तंत्रिका संबंधी विकारों के सटीक निदान और उपचार के लिए किया जाता है। पारंपरिक चिकित्सा जांचों की तुलना में यह तकनीक शरीर के भीतर होने वाले जैविक और कोशिकीय परिवर्तनों को देखने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है, जिससे रोगों का पता शुरुआती चरण में ही लगाना संभव हो जाता है।
न्यूक्लियर मेडिसिन की मूल अवधारणा और कार्यप्रणाली
न्यूक्लियर मेडिसिन चिकित्सा की वह शाखा है जिसमें रेडियोधर्मी पदार्थों (रेडियोआइसोटोप) की बहुत सूक्ष्म और सुरक्षित मात्रा का उपयोग किया जाता है। सामान्य एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई जैसी तकनीकें मुख्य रूप से शरीर की आंतरिक संरचना या ढाँचे की तस्वीरें दिखाती हैं। इसके विपरीत, न्यूक्लियर मेडिसिन स्कैन यह दर्शाते हैं कि शरीर के अंग किस प्रकार कार्य कर रहे हैं। इस प्रक्रिया के दौरान मरीज के शरीर में रेडियोआइसोटोप को दवा, इंजेक्शन या सांस के माध्यम से पहुंचाया जाता है। यह पदार्थ रक्त प्रवाह के जरिए लक्षित अंग या प्रभावित ऊतकों (जैसे ट्यूमर) तक पहुंचता है। इसके बाद, इससे निकलने वाली गामा किरणों को विशेष गामा कैमरा या स्पेक्ट (SPECT) और पेट (PET) स्कैनर द्वारा पकड़ा जाता है, जो अंग की कार्यप्रणाली का एक विस्तृत और त्रिआयामी चित्र तैयार करता है।
ANSTO की भूमिका और वैश्विक योगदान
ऑस्ट्रेलियाई परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी संगठन (ANSTO) रेडियोआइसोटोप के उत्पादन और अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व के अग्रणि संस्थानों में से एक है। सिडनी स्थित इसके ‘लूकास हाइट्स’ परिसर में संचालित अनुसंधान रिएक्टर से ऑस्ट्रेलिया की कुल न्यूक्लियर मेडिसिन खपत का लगभग 75 से 80 प्रतिशत हिस्सा उत्पादित होता है। औसतन प्रत्येक ऑस्ट्रेलियाई नागरिक अपने जीवनकाल में कम से कम दो बार न्यूक्लियर मेडिसिन प्रक्रियाओं से लाभान्वित होता है। ANSTO द्वारा निर्मित रेडियोआइसोटोप की मदद से हर सप्ताह लगभग 10,000 से 12,000 मरीजों की जांच और उपचार संभव हो पाता है, जो इसके व्यापक स्वास्थ्य योगदान को रेखांकित करता है।
न्यूक्लियर मेडिसिन में नए अनुसंधान और नवाचार
कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों के अधिक प्रभावी और लक्षित उपचार (टार्गेटेड थेरेपी) के लिए न्यूक्लियर मेडिसिन के क्षेत्र में नए-नए नवाचार हो रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, लुटेटियम-177 (Lutetium-177) का उपयोग एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर और मेलेनोमा के लक्षित उपचार के लिए क्लीनिकल ट्रायल में प्रमुखता से किया जा रहा है। इसी प्रकार, रेडियोइम्यूनोथेरेपी के अंतर्गत कैंसर कोशिकाओं को पहचानने वाले एंटीबॉडी के साथ रेडियोआइसोटोप को जोड़कर ठोस ट्यूमर को सटीक रूप से नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, गैर-मेलेनोमा त्वचा कैंसर के इलाज के लिए रेनियम-188 का उपयोग करके ‘रेनियम एससीटी’ तकनीक विकसित की गई है। अनुसंधानकर्ता स्कैंडियम-47 और टर्बियम-161 जैसे नए रेडियोआइसोटोप्स पर भी गहन शोध कर रहे हैं, ताकि शरीर में फैलने वाले अत्यंत सूक्ष्म ट्यूमर (मेटास्टेसिस) की पहचान और उपचार अधिक सटीकता से किया जा सके।

स्वास्थ्य सेवा में न्यूक्लियर मेडिसिन का भविष्य
न्यूक्लियर मेडिसिन न केवल रोगों की पहचान शुरुआती दौर में करने में सक्षम है, बल्कि यह थेरानोस्टिक्स (Theranostics) के सिद्धांत पर काम करती है—यानी जिस रेडियोआइसोटोप से बीमारी की पहचान की जाती है, उसी के उन्नत रूप से उसका इलाज भी संभव होता है। पारंपरिक कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी की तुलना में यह तकनीक स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाए बिना केवल प्रभावित कोशिकाओं को नष्ट करती है, जिससे मरीजों पर इसके दुष्प्रभाव काफी कम होते हैं। ANSTO जैसे वैश्विक अनुसंधान केंद्र इस तकनीक को और अधिक सुरक्षित, सटीक और सुलभ बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
