क्षेत्रीय समाचार

थराली क्षेत्र पंचायत की बैठक चढ़ी हंगामे की भेंट

 

वित्तीय आवंटन में भेदभाव का आरोप लगाकर सदस्यों का धरना

-हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 28 जुलाई। क्षेत्र पंचायत थराली की बैठक मंगलवार को वित्तीय आवंटन में कथित भेदभाव के आरोपों के चलते भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने राज्य वित्त आयोग, 15वें वित्त आयोग तथा क्षेत्र पंचायत निधि के आवंटन में पक्षपात का आरोप लगाते हुए सदन में नारेबाजी की और पीठ के समक्ष धरने पर बैठ गए। करीब दो घंटे तक चले गतिरोध के कारण बैठक की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। अंततः ब्लॉक प्रमुख को बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी।

ब्लॉक सभागार थराली में ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित की अध्यक्षता में बैठक शुरू होते ही सदस्य भावना रावत ने वित्तीय आवंटन में भेदभाव का मुद्दा उठाया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख राकेश जोशी ने भी आरोपों का समर्थन किया। इसके बाद सदस्य मनमोहन सिंह रावत ने नारेबाजी करते हुए धरना शुरू कर दिया। उनके साथ भावना रावत, भानु प्रकाश फरस्वाण, राकेश जोशी, बबीता और सुमन देवराड़ी भी धरने पर बैठ गए।
धरने के दौरान सदस्यों ने आरोप लगाया कि पंचायतों में ₹11 हजार कीमत की सोलर स्ट्रीट लाइटें ₹16 हजार में लगाई जा रही हैं। साथ ही उनका कहना था कि वित्तीय आवंटन का पूरा विवरण सदन के समक्ष नहीं रखा जाता।
गतिरोध समाप्त कराने के लिए ब्लॉक प्रमुख प्रवीण पुरोहित, ज्येष्ठ प्रमुख नवनीत रावत, कनिष्ठ प्रमुख राजेश चौहान, जिला पंचायत राज अधिकारी रमेश चंद्र त्रिपाठी, परियोजना निदेशक आनंद सिंह तथा खंड विकास अधिकारी नितिन धानिया ने धरनारत सदस्यों से वार्ता की। डीपीआरओ ने पंचायत राज अधिनियम की धारा-82 का हवाला देते हुए बताया कि सचिव, बीडीओ की देखरेख में नियोजन समिति के माध्यम से धन का आवंटन किया जाता है, जिसे बाद में सदन से अनुमोदित कराया जाता है। हालांकि धरने पर बैठे सदस्यों ने इस दलील से असहमति जताते हुए कहा कि आवंटन का विवरण सदन के समक्ष पारदर्शी तरीके से प्रस्तुत नहीं किया जाता।
इस दौरान ब्लॉक के लेखाकार ने प्राप्त धनराशि का विवरण सदन में पढ़कर सुनाया, लेकिन इससे भी सदस्य संतुष्ट नहीं हुए। कई बार बैठक की कार्यवाही शुरू कराने का प्रयास किया गया, किंतु हंगामे के कारण यह संभव नहीं हो सका। धरनारत और अन्य सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
इसी बीच प्रधान संघ के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह रावत के आह्वान पर सभी ग्राम प्रधान बैठक का बहिष्कार कर सदन से बाहर चले गए। इसके बावजूद धरनारत सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे। आखिरकार लगातार जारी हंगामे और गतिरोध को देखते हुए ब्लॉक प्रमुख ने बैठक को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा कर दी। इसके बाद ही धरनारत सदस्यों ने अपना धरना समाप्त किया।
बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद थे, लेकिन कार्यवाही स्थगित होने के कारण उन्हें बिना किसी निर्णय के लौटना पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!