25 साल पुराना सपना साकार होने की ओर, थराली-घाट सड़क से पिंडर और नंदाक घाटी के बीच घटेगी दूरी

–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली, 8 जून। पिंडर घाटी को नंदाक घाटी से सीधे मोटर मार्ग के जरिए जोड़ने की लंबे समय से चली आ रही मांग अब साकार होती दिखाई दे रही है। उत्तराखंड गठन के बाद से जिस थराली-घाट मोटर सड़क को लेकर दोनों क्षेत्रों के लोग संघर्ष कर रहे थे, उसके निर्माण की दिशा में अब ठोस प्रगति होने लगी है। लोक निर्माण विभाग थराली ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कवायद तेज कर दी है।
पिंडर घाटी के थराली, नारायणबगड़ और देवाल विकासखंडों की एक लाख से अधिक आबादी को इस सड़क से सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। वहीं नंदानगर (घाट) क्षेत्र के निवासियों के लिए भी यह मार्ग आवागमन और आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वर्तमान में दोनों घाटियों के लोगों को एक-दूसरे तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त खपत होती है।
दरअसल, पिंडर और नंदाक क्षेत्र के दर्जनों गांवों के बीच वर्षों से सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते जुड़े हुए हैं। रोटी-बेटी के इन संबंधों के बावजूद आधुनिक परिवहन व्यवस्था के अभाव में लोगों को सैकड़ों रुपये खर्च कर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि थराली-घाट सड़क बनने से न केवल दोनों क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा, बल्कि पिंडर घाटी से जिला मुख्यालय गोपेश्वर की दूरी और यात्रा समय में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
इस सड़क का राजनीतिक महत्व भी कम नहीं है। नंदानगर विकासखंड थराली विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है, लेकिन क्षेत्र के एक छोर से दूसरे छोर तक पहुंचने के लिए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को 50 से 90 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। सड़क बनने के बाद विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों के बीच संपर्क और प्रशासनिक पहुंच दोनों आसान हो जाएंगे।
परियोजना को हाल ही में तब नई गति मिली जब रूईसाण से घिनापानी तक लगभग चार किलोमीटर मोटर सड़क निर्माण को स्वीकृति मिल गई। घिनापानी गांव की निवासी और वर्ष 2020 से सड़क निर्माण के लिए संघर्ष कर रही पार्वती देवी ने बताया कि विधायक भूपाल राम टम्टा के प्रयासों से लंबे समय से लंबित इस सड़क के लिए लोक निर्माण विभाग ने निविदाएं आमंत्रित कर दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा, जिससे सबसे पहले घिनापानी के ग्रामीणों को राहत मिलेगी।
लोक निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार घिनापानी तक सड़क पहुंचने के बाद थराली और घाट को पूर्ण रूप से जोड़ने के लिए केवल लगभग नौ किलोमीटर सड़क का निर्माण शेष रहेगा। विभाग ने इस अंतिम चरण के लिए भी प्रारंभिक स्तर पर कार्यवाही शुरू कर दी है।
यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तो यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि पिंडर और नंदाक घाटियों के बीच सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक दूरी को समाप्त करने वाली जीवनरेखा साबित हो सकती है।
