विदेश सचिव को घर बिठा कर ईरान के साथ वार्ता किसी और से करा रहे हैं ट्रम्प
राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीति का बड़ा हिस्सा दूसरों को सौंपा, जबकि रुबियो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की दूसरी जिम्मेदारी पर केंद्रित
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-माइकल क्राउली की रिपोर्ट, वाशिंगटन से-
जब लगभग एक दशक पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ईरान के साथ परमाणु समझौते पर बातचीत की थी, तब उनके मुख्य वार्ताकार विदेश मंत्री जॉन केरी थे। करीब 20 महीनों तक चली बातचीत के दौरान केरी ने अपने ईरानी समकक्ष से कम से कम 18 अलग-अलग दिनों में मुलाकात की, और कई बार एक ही दिन में कई बैठकें भी कीं। उच्च स्तर की परमाणु कूटनीति अमेरिका के शीर्ष राजनयिक के लिए स्वाभाविक जिम्मेदारी मानी जाती रही है।
परंपरागत रूप से विदेश मंत्री देश की सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक जिम्मेदारियों—जैसे हथियार नियंत्रण संधियों से लेकर इज़राइल-फिलिस्तीन समझौतों—का नेतृत्व करते रहे हैं।
लेकिन अब जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस सप्ताहांत पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता के नए दौर के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी कर रहे हैं, तो उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो अक्सर की तरह घर पर ही रहेंगे।
इस महीने की शुरुआत में हुई अमेरिका-ईरान बैठक में भी रुबियो शामिल नहीं हुए थे। पिछले एक वर्ष में जिनेवा और दोहा में हुई कई बैठकों में भी उनकी अनुपस्थिति रही। इतना ही नहीं, यूक्रेन युद्ध और गाजा में इज़राइल के युद्ध को सुलझाने के प्रयासों से जुड़े अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों में भी वे नजर नहीं आए।
क्षेत्र में लंबे समय से जारी संकट और युद्ध के बावजूद उन्होंने पिछले वर्ष अक्टूबर में इज़राइल की एक संक्षिप्त यात्रा के बाद से मध्य-पूर्व का दौरा नहीं किया है।
विदेश यात्राओं में स्पष्ट कमी
हाल के महीनों में रुबियो अपनी दूसरी भूमिका—राष्ट्रपति ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार—में इतने व्यस्त रहे कि विदेश यात्राएं बेहद सीमित हो गईं।
इसके विपरीत, जो बाइडेन प्रशासन के दौरान विदेश मंत्री एंटनी जे. ब्लिंकन ने जनवरी 2024 से अप्रैल 2024 के अंत तक 11 विदेशी यात्राएं कीं और लगभग तीन दर्जन शहरों का दौरा किया था।
इस वर्ष अब तक रुबियो केवल छह विदेशी शहरों का दौरा कर पाए हैं, जिनमें 2026 शीतकालीन ओलंपिक के लिए मिलान की यात्रा भी शामिल है।
ट्रंप ने कूटनीति का जिम्मा सहयोगियों को सौंपा
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी कूटनीतिक जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा अन्य लोगों को सौंप दिया है। इनमें उनके मित्र स्टीव विटकॉफ, जो मैनहट्टन के रियल एस्टेट जगत से जुड़े एक धनी सहयोगी हैं, और उनके दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं।
विटकॉफ और कुशनर ने इज़राइल, यूक्रेन और रूस से संबंधित कूटनीति का नेतृत्व किया है। इसी तरह वे ईरान के प्रतिनिधिमंडल से भी इस महीने दूसरी बार पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में मिलने वाले हैं।
दोहरी भूमिका का प्रभाव
कूटनीति की अग्रिम पंक्ति से रुबियो की दूरी उनकी दोहरी भूमिका को दर्शाती है। पिछले एक वर्ष से वे विदेश मंत्री होने के साथ-साथ व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं।
1970 के दशक के मध्य में हेनरी ए. किसिंजर के बाद यह पहला अवसर है जब कोई व्यक्ति एक साथ ये दोनों पद संभाल रहा है।
विदेश मंत्री के रूप में वे विदेश विभाग का संचालन करते हैं और दुनिया भर में अमेरिकी दूतावासों तथा राजनयिकों की देखरेख करते हैं। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में वे व्हाइट हाउस से विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए राष्ट्रपति को नीतिगत सलाह देते हैं।
यह दोहरी जिम्मेदारी ट्रंप के साथ उनकी नजदीकी और प्रभाव को भी दर्शाती है। कम विदेश यात्राओं का अर्थ है कि वे एक ऐसे राष्ट्रपति के अधिक निकट रह सकते हैं, जो अचानक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा निर्णय ले सकते हैं।
आलोचना और समर्थन दोनों
जब इस महीने की शुरुआत में विटकॉफ, कुशनर और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान में ईरानी अधिकारियों से मिल रहे थे, उसी समय रुबियो ट्रंप के साथ एक अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (UFC) कार्यक्रम में मौजूद थे।
वॉशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर की विश्लेषक एम्मा एशफोर्ड का कहना है,
“रुबियो स्पष्ट रूप से ट्रंप के करीब रहना पसंद करते हैं।”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह गलत नहीं है, क्योंकि अतीत में भी कुछ राष्ट्रपतियों ने विदेश मंत्री के अलावा अन्य अधिकारियों को प्रमुख कूटनीतिक जिम्मेदारियां सौंपी हैं। उदाहरण के तौर पर, राष्ट्रपति जोसेफ आर. बाइडेन जूनियर ने रूस से बातचीत और इज़राइल-हमास संघर्ष में युद्धविराम के प्रयासों के लिए अपने सीआईए निदेशक विलियम जे. बर्न्स को जिम्मेदारी दी थी।
फिर भी कई वर्तमान और पूर्व राजनयिकों का मानना है कि रुबियो दोनों पदों की जिम्मेदारी निभाने के बजाय अधिकतर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका निभाते दिखाई देते हैं।
एम्मा एशफोर्ड ने कहा,
“मुझे लगता है कि इससे विदेश विभाग को नुकसान पहुंच रहा है और अमेरिका की समग्र कूटनीतिक क्षमता प्रभावित हो रही है, क्योंकि प्रभावी रूप से विदेश मंत्री का पद खाली-सा दिखाई दे रहा है।”
विदेश विभाग का पक्ष
विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने इन आलोचनाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस और अन्य एजेंसियों के साथ रुबियो का निकट समन्वय सकारात्मक है।
उनके अनुसार,
“अब राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और विदेश विभाग पूरी तरह एक-दूसरे के अनुरूप काम कर रहे हैं—एक ऐसा लक्ष्य जो दशकों तक पिछले प्रशासन हासिल नहीं कर पाए।”
दो जगहों के बीच संतुलन
रुबियो अपना समय विदेश विभाग और व्हाइट हाउस के बीच बांटते हैं और कई बार एक ही दिन में दोनों जगह काम करते हैं। पिछले वर्ष जून में दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि वे लगभग हर दिन विदेश विभाग जाते हैं और वहां आने वाले विदेशी प्रतिनिधियों से मुलाकात करते हैं।
पिछले सप्ताह उन्होंने विदेश विभाग में लेबनान और इज़राइल के अधिकारियों के बीच बैठक की अध्यक्षता की, जिसने लेबनान में संभावित युद्धविराम की नींव रखी।
उनका कहना है कि दोनों पद कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
“अक्सर आप एक ही बैठकों और स्थानों पर होते हैं—बस एक व्यक्ति कम हो जाता है,” उन्होंने कहा।
विदेश यात्राओं की आवश्यकता कम बताई
पिछले दिसंबर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अपनी सीमित विदेश यात्राओं पर सवाल पूछे जाने पर रुबियो ने कहा कि उन्हें विदेश जाने की कम आवश्यकता पड़ती है, क्योंकि “कई विश्व नेता लगातार व्हाइट हाउस आकर ट्रंप से मुलाकात करते रहते हैं।”
वे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की भूमिका में ट्रंप की विदेशी यात्राओं में भी शामिल होते हैं।
विशेषज्ञों की चिंता
राष्ट्रीय सुरक्षा के कई विशेषज्ञ इस व्यवस्था को जोखिमपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि दोनों पद अत्यंत चुनौतीपूर्ण हैं और एक साथ निभाना कठिन है।
यहां तक कि किसिंजर के लिए भी यह आसान नहीं था, जिन्होंने 1973 में राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन के कार्यकाल में दोनों पद संभाले थे। किसिंजर लगातार यात्रा करते रहे और मध्य-पूर्व में 33 दिनों तक लगातार ‘शटल कूटनीति’ में लगे रहे।
मैथ्यू वैक्समैन, जिन्होंने जॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद, विदेश विभाग और पेंटागन में वरिष्ठ पदों पर काम किया था, कहते हैं,
“सामान्य तौर पर इन दोनों भूमिकाओं को जोड़ना एक गलती है।”
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान परिस्थिति में, जब ईरान के साथ अत्यंत संवेदनशील वार्ता चल रही है, तो किसी व्यक्ति का पर्दे के पीछे रहकर वैश्विक विदेश नीति का प्रबंधन करना भी आवश्यक हो सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान के साथ जारी संवेदनशील वार्ताओं और विश्व के कई संघर्ष क्षेत्रों के बीच मार्को रुबियो की सीमित विदेश यात्राएं और दोहरी भूमिका अमेरिकी कूटनीति की शैली में आए बदलाव को दर्शाती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कूटनीति का बड़ा हिस्सा अपने भरोसेमंद सहयोगियों को सौंपना और विदेश मंत्री का अपेक्षाकृत ‘घरेलू’ भूमिका में रहना, अमेरिकी विदेश नीति के संचालन में एक नया और विवादास्पद प्रयोग माना जा रहा है।
