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बलई मिश्र जी का गंभीर मजाक : जिसको हिन्दू धर्म का कोई ओर- छोर पता नहीं है

-गोविंद प्रसाद बहुगुणा
फेसबुक पर मैं कई पोस्ट देखता हूँ जिसमें मोटे अक्षरों में यह नारा लिखा रहता है “गर्व से बोलो हम हिन्दू हैं ” -जिसको हिन्दू धर्म का कोई ओर- छोर पता नहीं है वह क्या नारों को बोलकर हिन्दू हो जायेगा आपके कहने से ?

इसी बात पर अपने एक मित्र स्व० शुभनाथ यादव की याद ताजा हो गयी I मैं जब बिजनौर में सेवारत था तो वह चिकित्सा विभाग में नये नये भर्ती हुए थे -शुभनाथ मेरे छोटे भाई लो के दोस्त बन गये थे तो उनका अक्सर मेरे घर आना जाना होता रहता था और मुझे वह बड़े भाई की तरह आदर देते थे I शुभनाथ शायद फैजाबाद के रहने वाले थे, बड़ी मस्त तबियत का लड़का था वह ।

उसने एक दिन एक किस्सा सुनाया कि हमारे पूरब में बलई मिश्र नाम के एक पंडित जी थे ,उनके किस्से अकबर बीरबल की तरह मशहूर है -बलई मिश्र बनारस की तरफ के रहने वाले बहुत विनोदी स्वभाव के इंसान थे लेकिन कभी बहुत गंभीर मजाक भी कर बैठते थे I एक किस्सा उनके व्यक्तिगत जीवन का यह रहा कि उनके बाल- बच्चे उनकी इस मजाकिया हरकत से बहुत परेशान थे I
उनकी बेटी का रिश्ता तय हुआ तो बलई मिश्र के बेटों ने अपने बाप को एक कमरे में ऐतिहातन बंद कर दिया कि कहीं ये श्रीमान बारातियों से कोई गंभीर मजाक न कर बैठें और उसको हमारे लिए संभालना मुश्किल हो जाय I उनको खाना- पीना सब बंद कमरे में ही पहुँचाने का इंतजाम किया गया ताकि इन्हें बाहर निकलने का मौका ही न मिले I खैर शाम को लड़की की बारात बलई मिश्र के घर पहुंची -विवाह का लगन कार्यक्रम रात को शांतिपूर्वक संपन्न हुआ I सुबह हुई तो बलई मिश्र ने अपने बेटों को पुकारना शुरू कर दिया कि- दरवाजा खोलो मुझे दिशा मैदान जाना है । उन्हें इस बहाने बाहर जाने दिया गया।

खेतों की तरफ जाते हुए उन्हें कुछ लोग दिखाई दिए तो बलई मिश्र ने उनसे पूछा कहाँ से हो आप लोग ? उन्होंने बताया हम बलई मिश्र की बेटी की शादी में बाराती बनकर आये हैं I अब बलई मिश्र उनसे बोले- तुमने बलई मिश्र को देखा है ? उन्होंने कहा नहीं , हम उन्हें नहीं पहचानते I बलई मिश्र ने उन्हें बताया मैं तुमको एक राज की बात बता रहा हूँ , किसी से कहना नहीं – बलई मिश्र की वह बेटी “पेट से है ” I

अच्छा ! फिर तो वे लोग तेज क़दमों से जनबासे में पहुंचे और उन्होंने दूल्हे के परिवार जनों को खुस- फुस में वह सब सुना दी जो उन्होंने उस अजनबी बूढ़े के मुंह से सुनी थी I सुनकर वर पक्ष के परिवार जन भड़क उठे और कहा -हमारे साथ धोखा हुआ है I लड़की के भाईयों को बुलवाया गया , उन्हें सारी बात बताई I अब क्या करें ? –

एक भाई ने कहा बाबा को कमरे से बाहर निकालो यह सब उसी का किया हुआ लगता है , उसको सुबह बाहर क्या निकाला कि यह मुसीबत आन पडी ,अब वही संभालें जिसने यह बबाल खडा किया I बलई मिश्र को बेेटे कमरे से बाहर लाये और उन बारातियों से पूछा कि यही मिले थे तुमको आज सुबह । सबने कहा हां यही तो हैं वह जिन्होंने हमे यह बात बताई थी । बेटों ने कहा यह हमारे पिता जी बलई मिश्र हैं ।अब यही आपको असलियत बता सकते हैं ।
अब बलई मिश्र बोले-बोलो बरातियो तुम में से ऐसा कौन है जो पेट से नहीं हुआ वह हाथ खडा करे । जब सब चुप हो गये तो बलई ने कहा तुम्हारी तरह मेरी बेटी भी पेट से है भाई । इतनी अक्ल नहीं तुम में कि शादी ब्याह में कोई मजाक भी कर सकता है..
उसको झेलने की अक्ल चाहिए। इस प्रकार हंसारोळी में बारात निपटी इस किस्से को साथ लेकर ।
GPB

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