सड़क नहीं मिली तो खुद जुटे सकंड के ग्रामीण

–दिग्पाल गुसाईं की रिपोर्ट-
गौचर, 12 सितम्बर। कर्णप्रयाग विकासखंड के दूरस्थ सकंड गांव को तमाम आश्वासनों के बावजूद सड़क सुविधा नहीं मिली तो ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क की खुदाई शुरू कर दी। लंबे समय से सड़क की मांग कर रहे ग्रामीणों के इस कदम ने सरकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आजादी के 79 साल बाद भी सकंड गांव के लोगों को गांव तक पहुंचने के लिए आठ से दस किलोमीटर जंगल के बीच उबड़-खाबड़ रास्तों से पैदल सफर करना पड़ता है। ग्रामीण सड़क की मांग को लेकर कई बार आंदोलन करने के साथ चुनाव बहिष्कार तक कर चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें आश्वासनों के अलावा कुछ नहीं मिला। सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में गांव से लगातार पलायन भी हुआ है।
ग्रामीणों की परेशानी बच्चों की शिक्षा को लेकर भी बढ़ी है। कम छात्र संख्या के कारण गांव का वर्षों पुराना प्राथमिक विद्यालय बंद हो चुका है। ऐसे में कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए गौचर अथवा कर्णप्रयाग में किराये पर कमरा लेकर रहने को मजबूर हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह व्यवस्था संभव नहीं होने से उनके बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
लगातार उपेक्षा से परेशान ग्रामीणों ने पांच जनवरी 2026 को कर्णप्रयाग उपजिलाधिकारी कार्यालय में धरना दिया था। इसके बाद शासन-प्रशासन सक्रिय हुआ और क्षेत्रीय विधायक अनिल नौटियाल के माध्यम से जल्द सड़क निर्माण का आश्वासन मिलने पर ग्रामीणों ने धरना समाप्त कर दिया। इसके बाद 10 जनवरी से लोक निर्माण विभाग गौचर ने सड़क के लिए नए सिरे से सर्वेक्षण शुरू किया।
ग्रामीणों का कहना है कि सर्वेक्षण के आठ महीने बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं दी। इससे नाराज ग्रामीण अब स्वयं सड़क की खुदाई में जुट गए हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा करते-करते वे थक चुके हैं और अब अपने गांव तक रास्ता पहुंचाने के लिए स्वयं श्रमदान कर रहे हैं।
लोक निर्माण विभाग गौचर के अधिशासी अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि विभाग को अभी तक सकंड मोटर मार्ग की स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। इस संबंध में जिलाधिकारी को भी अवगत कराया जा चुका है।
