कैलाश की ओर अग्रसर बड़ी जात में खलल डालने का प्रयास
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नंदा बड़ी जात के बीच प्रशासन के चेतावनी पत्र से विवाद
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यात्रा निकलने के बाद समिति को नोटिस पर उठे सवाल, प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवालिया निशान

–हरेंद्र बिष्ट की रिपोर्ट-
थराली/नंदाधाम कुरूड़, 9 सितम्बर। श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी सिद्धपीठ कुरूड़ (नंदानगर) से तीन नंदा देवी की डोलियों के ‘श्री नंदा राजराजेश्वरी बड़ी जात’ के तहत कैलाश यात्रा पर निकलने के चार दिन बाद चमोली जिला प्रशासन द्वारा आयोजन समिति को चेतावनी पत्र जारी किए जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। यात्रा के बीच जारी इस पत्र को लेकर आयोजन समिति ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे धार्मिक यात्रा में अनावश्यक हस्तक्षेप बताया है। साथ ही प्रशासन की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि यात्रा के वर्तमान कार्यक्रम का एक अन्य पक्ष पहले से विरोध करता रहा है।
जिलाधिकारी चमोली की ओर से जारी पत्र में यात्रा के अंतिम आबाद गांव वांण में संभावित अव्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति का उल्लेख करते हुए आयोजन समिति को ग्राम प्रधान और ग्रामीणों से विचार-विमर्श कर विवाद का समाधान करने को कहा गया है। साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर उत्तरदायित्व निर्धारित कर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। धार्मिक यात्रा शुरू हो जाने के बाद इस तरह का पत्र जारी किए जाने से आयोजन समिति और श्रद्धालुओं में नाराजगी है। समिति का कहना है कि इससे यात्रा के निर्बाध संचालन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

दरअसल, जिलाधिकारी चमोली गौरव कुमार ने 4 सितंबर को नायब तहसीलदार नंदानगर (घाट) के माध्यम से नंदा देवी बड़ी जात-2026 आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को पत्र भेजा था। पत्र में कहा गया कि विकासखंड देवाल के वांण गांव की ग्राम प्रधान नंदुली देवी ने प्रशासन को अवगत कराया है कि नंदा देवी लोकजात मां राजराजेश्वरी के साथ कुरूड़ से बड़ी जात समिति के अध्यक्ष के नेतृत्व में दो अन्य डोलियों और बड़ी संख्या में यात्रियों के वांण पहुंचने से गांव में अव्यवस्था एवं अशांति उत्पन्न होने की आशंका है।
इस पर जिलाधिकारी ने बड़ी जात समिति के अध्यक्ष से अपेक्षा की कि वह वांण की ग्राम प्रधान एवं ग्रामीणों से विचार-विमर्श कर आपसी सहमति से विवाद का निस्तारण करें। पत्र में यह भी कहा गया कि प्रस्तावित यात्रा के दौरान शांति एवं कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधित का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन के इस पत्र के जवाब में सोमवार को आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत ने नायब तहसीलदार नंदानगर के माध्यम से जिलाधिकारी को तीन पृष्ठों का पत्र भेजा। उन्होंने कहा कि बड़ी जात आयोजित करने का निर्णय महीनों पहले सिद्धपीठ कुरूड़ मंदिर में विधिवत रूप से पुजारियों, देव डोलियों और मंदिर समिति द्वारा लिया गया था और उसी के अनुरूप यात्रा प्रारंभ हुई है।
कर्नल रावत ने आरोप लगाया कि गौड़ पुजारियों का एक गुट, जो राजजात समिति नौटी से भी जुड़ा है, यात्रा में अवरोध उत्पन्न करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इसे सुनियोजित प्रयास बताते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बड़ी जात समिति शासन-प्रशासन, राजजात समिति और अन्य संबंधित समितियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास करती रही है।
आयोजन समिति ने धार्मिक अधिकारों का प्रश्न भी उठाया है। कर्नल रावत ने अपने पत्र में कहा कि वांण में नंदा देवी के धर्म भाई माने जाने वाले लाटू देवता का पौराणिक मंदिर स्थित है और यह समस्त नंदा भक्तों की धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में श्रद्धालुओं अथवा देव डोलियों के वांण प्रवेश में बाधा उत्पन्न करना धार्मिक भावनाओं और परंपरागत आवागमन के अधिकार से जुड़ा गंभीर विषय है।
समिति का यह भी कहना है कि शांतिपूर्ण धार्मिक यात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का दायित्व शासन और प्रशासन का है। कर्नल रावत ने प्रशासन से समय रहते यात्रा मार्ग पर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग करते हुए स्पष्ट किया है कि बड़ी जात समिति संवाद और विचार-विमर्श के लिए हमेशा तैयार है।
इस घटनाक्रम ने प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर देव डोलियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चार दिन पहले ही कैलाश यात्रा के लिए निकल चुकी हैं, दूसरी ओर यात्रा के कार्यक्रम का विरोध कर रहे पक्ष की आपत्ति के आधार पर आयोजन समिति को कानून-व्यवस्था संबंधी चेतावनी दिए जाने से निष्पक्षता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि प्रशासन ने अपने पत्र में यात्रा रोकने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया है और उसका जोर ग्राम प्रधान तथा ग्रामीणों से बातचीत कर विवाद सुलझाने पर है।
नंदा देवी की यह यात्रा महज एक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं से जुड़ी हुई है। ऐसे में यात्रा के बीच जारी पत्राचार से श्रद्धालुओं की भावनाएं प्रभावित होने के साथ ही यात्रा के सुचारु संचालन को लेकर भी आशंकाएं पैदा हुई हैं।
अब जबकि तीनों देव डोलियां कैलाश गमन के लिए आगे बढ़ चुकी हैं और उनके होमकुंड तक जाने का कार्यक्रम है, सबसे बड़ा सवाल निर्जन एवं दुर्गम पड़ावों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का है। देखना होगा कि विवाद को बढ़ने से रोकते हुए शासन-प्रशासन किस प्रकार सभी पक्षों के बीच समन्वय स्थापित करता है और इस महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा को शांतिपूर्ण एवं सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए क्या व्यवस्थाएं करता है।
