खेल/मनोरंजन

पहाड़ की भागीरथी ने हैदराबाद मैराथन में लहराया परचम

42 किमी की दौड़ 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर पाया दूसरा स्थान, ओलंपिक में स्वर्ण जीतना लक्ष्य

गौचर, 31 अगस्त (दिग्पाल गुसाईं)। चमोली जिले के सीमांत और दुर्गम गांव वाण की बेटी भागीरथी बिष्ट ने अपनी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और मजबूत इरादों के दम पर एक बार फिर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है। हैदराबाद में आयोजित मैराथन में 24 वर्षीय भागीरथी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 42 किलोमीटर की दौड़ महज 2 घंटे 51 मिनट में पूरी की और दूसरा स्थान हासिल किया। पहाड़ के छोटे से गांव से निकलकर मैराथन जैसे कठिन खेल में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही भागीरथी की इस उपलब्धि से चमोली जिले के साथ ही देवाल क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन के लिए भागीरथी को तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी ने मेडल प्रदान कर सम्मानित किया। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में दूसरा स्थान हासिल करना भागीरथी के अब तक के खेल सफर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। सीमित संसाधनों और पहाड़ की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच आगे बढ़ते हुए उन्होंने यह साबित किया है कि मजबूत संकल्प और निरंतर अभ्यास के बल पर बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।
दुर्गम वाण गांव से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
चमोली जिले के देवाल विकासखंड का वाण गांव अपनी दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। इसी ग्रामीण परिवेश से निकलकर भागीरथी ने लंबी दूरी की दौड़ में अपनी अलग पहचान बनाई है। मैराथन में सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, नियमित अभ्यास और अनुशासन है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खेल को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचीं।
भागीरथी के कोच, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर निवासी एवं अंतरराष्ट्रीय मैराथन एथलीट सुनील शर्मा ने बताया कि हैदराबाद में भागीरथी ने 42 किलोमीटर की मैराथन 2 घंटे 51 मिनट में पूरी कर दूसरा स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे भागीरथी की लगातार कड़ी मेहनत और लगन है। वह नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं और अपने प्रदर्शन में सुधार के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।
ईरान में भी कर चुकी हैं भारत का प्रतिनिधित्व
भागीरथी का सफर हैदराबाद मैराथन तक सीमित नहीं है। इससे पहले वह ईरान में आयोजित 42 किलोमीटर मैराथन में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद अब हैदराबाद में शानदार प्रदर्शन ने उनके खेल सफर में एक और उपलब्धि जोड़ दी है। इसके अलावा वह देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कई मैराथन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकी हैं।
लंबी दूरी की मैराथन में 42 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करना किसी भी खिलाड़ी के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती और धैर्य की बड़ी परीक्षा होती है। इसके लिए लंबे समय तक नियमित प्रशिक्षण, गति और सहनशक्ति के बीच संतुलन तथा कठिन परिस्थितियों में भी लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखना जरूरी होता है। भागीरथी ने लगातार अभ्यास के जरिए इसी क्षमता को मजबूत किया है।
उनकी उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण की आधुनिक सुविधाएं और खेल संसाधन बड़े शहरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम मिल पाते हैं। इसके बावजूद उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्र से निकलकर भागीरथी ने लंबी दूरी की दौड़ में जिस तरह अपनी पहचान बनाई है, उससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों, विशेषकर बेटियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
अब निगाह ओलंपिक पर
कोच सुनील शर्मा के अनुसार भागीरथी का लक्ष्य केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मैराथन प्रतियोगिताओं में पदक हासिल करना नहीं है। उनकी सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। वह ओलंपिक मैराथन में स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम दुनिया में रोशन करने का सपना लेकर तैयारी कर रही हैं।
हैदराबाद में मिली सफलता ने उनके इस सपने की ओर बढ़ते कदमों को नया आत्मविश्वास दिया है। वाण जैसे सीमांत गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने और अब राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित मैराथन में दूसरा स्थान हासिल करने तक भागीरथी का सफर पहाड़ की उस युवा पीढ़ी के लिए प्रेरक है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद अपने सपनों को बड़ा रखने का साहस करती है।
भागीरथी की सफलता से उनके गृह क्षेत्र में भी उत्साह है। चमोली और देवाल क्षेत्र के लोगों के लिए यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं, बल्कि पहाड़ की प्रतिभाओं की क्षमता का उदाहरण भी है। अब भागीरथी की निगाह अपने प्रदर्शन को लगातार बेहतर करने और उस बड़े लक्ष्य पर है, जहां वह ओलंपिक में तिरंगे के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं।

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