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अंतरिक्ष में मानव : धरती से बाहर बस रही हमारी दूसरी प्रयोगशाला

For more than two decades, people have lived and worked continuously aboard the International Space Station, advancing scientific knowledge, and making research breakthroughs that are not possible on Earth.The International Space Station is an unprecedented achievement in global human endeavors to build and utilize a research platform in space. Since 2000, the station evolved from an outpost into a highly capable microgravity laboratory. Results are compounding, new benefits are emerging, and the third decade is building on research.

 

-A NASA FEATURE EDITED/ TRANSLATED BY ADITYA S RAWAT-

मनुष्य आखिर अंतरिक्ष में क्यों जाता है? क्या केवल चंद्रमा और मंगल पर पहुंचने के लिए, या ब्रह्मांड के रहस्य जानने के लिए? वास्तव में अंतरिक्ष में मानव की मौजूदगी का संबंध जितना दूर सितारों से है, उतना ही हमारी धरती, स्वास्थ्य, भोजन, पर्यावरण और भविष्य से भी है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रही यह प्रयोगशाला पिछले ढाई दशक से यह खोज रही है कि अंतरिक्ष में सीखी गई बातें धरती पर इंसानी जिंदगी को कैसे बेहतर बना सकती हैं।

2 नवम्बर 2000 को पहला दल आईएसएस पहुंचा था। उसके बाद से वहां मनुष्य की उपस्थिति कभी समाप्त नहीं हुई। नवम्बर 2025 में इस निरंतर मानव मौजूदगी के 25 वर्ष पूरे हो गए। अब तक 26 देशों के 290 से अधिक लोग अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच चुके हैं और नासा तथा उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार 4,000 से अधिक वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी परीक्षण कर चुके हैं। दुनिया के हजारों वैज्ञानिक इन प्रयोगों से जुड़े हैं।

आईएसएस लगभग 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की परिक्रमा करता है। वहां गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव पृथ्वी की सतह जैसा महसूस नहीं होता। इसी सूक्ष्म गुरुत्व की स्थिति ने इसे ऐसी अनोखी प्रयोगशाला बना दिया है, जिसकी परिस्थितियां धरती पर लंबे समय तक तैयार करना संभव नहीं।

अंतरिक्ष में जाने की जरूरत क्या है?

नासा मानव अंतरिक्ष अन्वेषण को कुछ बुनियादी सवालों से जोड़ता है—हम यहां क्यों हैं, ब्रह्मांड की शुरुआत कैसे हुई, क्या पृथ्वी के बाहर भी जीवन है और मानवता का अगला पड़ाव क्या होगा? लेकिन इनके साथ एक अत्यंत व्यावहारिक प्रश्न भी है—अंतरिक्ष विज्ञान से धरती पर हमारा जीवन बेहतर कैसे बनाया जा सकता है?

इसका जवाब अंतरिक्ष स्टेशन पर हो रहे प्रयोगों में मिलता है। भारहीनता में मानव शरीर पृथ्वी से अलग व्यवहार करता है। हड्डियों और मांसपेशियों से लेकर हृदय, रक्त संचार, आंखों और प्रतिरक्षा प्रणाली तक में परिवर्तन आते हैं। इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों का शरीर अपने आप में एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला बन जाता है। लंबी अवधि के मिशनों से मिलने वाली जानकारी भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा के साथ धरती पर उम्र बढ़ने और अनेक बीमारियों को समझने में भी उपयोगी हो सकती है।

अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक रूबियो ने 2022-23 में लगातार 371 दिन अंतरिक्ष में बिताए। उनके लंबे प्रवास ने वैज्ञानिकों को यह अध्ययन करने का अवसर दिया कि एक वर्ष से अधिक समय तक सूक्ष्म गुरुत्व में रहने पर शरीर और मन किस तरह अनुकूलन करते हैं।

अंतरिक्ष से निकल रही दवा और चिकित्सा की नई राह

आईएसएस पर प्रोटीन क्रिस्टल के अध्ययन से वैज्ञानिक यह समझने का प्रयास करते रहे हैं कि बीमारियों से जुड़े प्रोटीन किस तरह व्यवहार करते हैं। सूक्ष्म गुरुत्व में कुछ प्रोटीन क्रिस्टल पृथ्वी की तुलना में अधिक व्यवस्थित तरीके से विकसित हो सकते हैं, जिससे उनकी संरचना समझने और संभावित दवाओं पर शोध में मदद मिलती है।

अंतरिक्ष में स्टेम सेल, ऊतक और अन्य जैविक नमूनों पर भी प्रयोग किए जा रहे हैं। मानव ऊतकों की 3डी बायोप्रिंटिंग जैसे प्रयोग भविष्य की चिकित्सा के नए रास्ते खोल सकते हैं। अंतरिक्ष स्टेशन पर डीएनए अनुक्रमण भी किया जा चुका है। इस प्रकार आईएसएस केवल अंतरिक्ष यात्रियों की प्रयोगशाला नहीं, बल्कि धरती की चिकित्सा विज्ञान के लिए भी एक महत्वपूर्ण शोध केंद्र बन गया है।

खेत से जंगल तक अंतरिक्ष की नजर

अंतरिक्ष स्टेशन का लाभ केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है। नासा का ईकोस्ट्रेस उपकरण पृथ्वी की वनस्पति के तापमान और पानी की जरूरत संबंधी जानकारी जुटाता है। इससे वैज्ञानिक पौधों पर पड़ने वाले जल-संकट को समझ सकते हैं। ऐसे आंकड़े किसानों को सिंचाई प्रबंधन, सूखे की स्थिति समझने और जंगलों में आग के जोखिम के अध्ययन में मदद कर सकते हैं।

अंतरिक्ष यात्री तूफान, बादल, समुद्र, हिमखंड, जंगल की आग और पृथ्वी की दूसरी प्राकृतिक घटनाओं को भी ऊपर से देखते और दर्ज करते हैं। पृथ्वी पर जिसे हम स्थानीय घटना समझते हैं, अंतरिक्ष से देखने पर वही वैश्विक पर्यावरण व्यवस्था का हिस्सा दिखाई देती है।

अंतरिक्ष में उग रही सब्जियां

मनुष्य यदि भविष्य में महीनों या वर्षों की यात्रा करके मंगल तक जाएगा तो भोजन का पूरा भंडार साथ ले जाना व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए अंतरिक्ष में पौधे उगाना मानव की भावी यात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है।

आईएसएस पर सलाद पत्ते, मूली, मिर्च और टमाटर जैसी फसलों पर प्रयोग किए जा चुके हैं। इनसे वैज्ञानिक यह जान रहे हैं कि सूक्ष्म गुरुत्व में बीज कैसे अंकुरित होते हैं, जड़ें किस दिशा में बढ़ती हैं और पौधों को प्रकाश तथा पानी किस तरह दिया जाए। भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पौधे भोजन के साथ ऑक्सीजन और मानसिक राहत का भी स्रोत बन सकते हैं।

चंद्रमा और मंगल की तैयारी

आईएसएस को मानवता के अगले अंतरिक्ष अभियान की प्रशिक्षणशाला भी कहा जा सकता है। पृथ्वी की निचली कक्षा में रहकर वैज्ञानिक जीवन-रक्षक प्रणालियों, अंतरिक्ष पोशाक, रोबोटिक्स, संचार, जल पुनर्चक्रण और लंबी अवधि तक मानव स्वास्थ्य बनाए रखने वाली तकनीकों को परख रहे हैं।

चंद्रमा और विशेषकर मंगल की यात्रा में अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से बहुत दूर होंगे। वहां अचानक खराब हुए उपकरण को तुरंत पृथ्वी पर भेजकर ठीक नहीं कराया जा सकेगा। इसलिए अंतरिक्ष में ही वस्तुओं और उपकरणों के निर्माण की तकनीक विकसित की जा रही है। 3डी प्रिंटिंग इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रयोग है।

नासा के लिए आईएसएस इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां मिले अनुभव आर्टेमिस अभियानों में काम आएंगे। आर्टेमिस के माध्यम से मनुष्य को फिर चंद्रमा तक ले जाने और वहां लंबे समय तक वैज्ञानिक गतिविधियों की क्षमता विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद लक्ष्य मंगल की मानव यात्रा है।

जब धरती की सीमाएं अंतरिक्ष में पीछे छूट जाती हैं

आईएसएस विज्ञान के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग का भी अनूठा प्रयोग है। अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसियां दशकों से इसे संचालित करने में सहयोग करती रही हैं। पृथ्वी पर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद अंतरिक्ष में वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों को एक-दूसरे पर निर्भर रहना पड़ता है।

चंद्रमा और उससे आगे के शांतिपूर्ण तथा जिम्मेदार अन्वेषण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग का दायरा भी बढ़ा है। अगस्त 2026 तक आर्टेमिस समझौते से जुड़ने वाले देशों की संख्या 71 पहुंच चुकी थी। ये समझौते अंतरिक्ष के नागरिक उपयोग में पारदर्शिता, सुरक्षा और सहयोग के साझा सिद्धांतों पर आधारित हैं।

अंतरिक्ष स्टेशन ने एक नई अर्थव्यवस्था की नींव भी तैयार की है। निजी कंपनियां अब अंतरिक्ष यात्रियों और सामान को कक्षा तक पहुंचा रही हैं। अंतरिक्ष में दवा, सामग्री, संचार तकनीक और निर्माण की संभावनाओं पर व्यावसायिक प्रयोग बढ़ रहे हैं। कभी जो क्षेत्र केवल कुछ सरकारों की पहुंच में था, उसमें निजी उद्योग तेजी से प्रवेश कर रहा है।

अंतरिक्ष की खोज अंततः मनुष्य की खोज

अंतरिक्ष में 25 वर्षों की लगातार मानव उपस्थिति का सबसे बड़ा संदेश शायद यह है कि अंतरिक्ष विज्ञान धरती से पलायन की परियोजना नहीं है। अंतरिक्ष में जाकर मनुष्य बार-बार अपनी ही पृथ्वी को नए ढंग से समझ रहा है।

आईएसएस की खिड़की से दिखाई देने वाली पृथ्वी पर देशों की सीमाएं नजर नहीं आतीं। दिखाई देता है नीले महासागरों, सफेद बादलों और पतले वातावरण से घिरा एक छोटा-सा ग्रह। यही वह दुनिया है जहां से मानव की यात्रा शुरू हुई और फिलहाल यही उसका एकमात्र घर है।

अंतरिक्ष स्टेशन पर होने वाला हर प्रयोग दो दिशाओं में आगे बढ़ रहा है—एक चंद्रमा, मंगल और उससे आगे की ओर, दूसरा वापस पृथ्वी की ओर। पहली दिशा मानव की खोज की सीमा बढ़ाती है, जबकि दूसरी हमें अपने स्वास्थ्य, पर्यावरण और ग्रह को बेहतर समझने में मदद करती है। शायद इसीलिए अंतरिक्ष में मनुष्य की कहानी वास्तव में अंतरिक्ष की नहीं, मानवता के भविष्य की कहानी है।

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