उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन के लिए नए स्थल और पर्यटन सर्किट होंगे विकसित
देहरादून, 27 अगस्त। उत्तराखंड में शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों को वर्षभर आकर्षित करने के लिए नए पर्यटन स्थल और सर्किट विकसित किए जाएंगे। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने गुरुवार को पर्यटन विभाग की बैठक में इसके लिए स्थानीय सहभागिता बढ़ाने और कम प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को विकसित करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन को नैनीताल और मसूरी जैसे अधिक पर्यटक दबाव वाले पारंपरिक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय नए क्षेत्रों तक विस्तार दिया जाए। गढ़वाल मंडल विकास निगम, कुमाऊं मंडल विकास निगम, पर्यटन व्यवसायियों और संबंधित विभागों के सुझाव लेकर शीतकालीन पर्यटन की संभावनाओं वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए।
उन्होंने प्रत्येक संभावित स्थल की विशेषता के अनुरूप पर्यटन गतिविधियां विकसित करने के निर्देश दिए। इनमें नए पैदल यात्रा मार्ग, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मैराथन, पक्षी अवलोकन, प्रकृति और साहसिक पर्यटन जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। स्थानीय समुदायों और पर्यटन व्यवसायियों को योजनाओं से जोड़कर रोजगार बढ़ाने और पलायन कम करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने नए पर्यटन स्थलों के विकास के लिए समान भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों वाले विदेशी पर्यटन स्थलों के सफल प्रयोगों का अध्ययन करने को कहा। जागेश्वर, कसार देवी और सूर्य मंदिर को जोड़कर समेकित पर्यटन पैकेज विकसित करने के भी निर्देश दिए गए।
उन्होंने नई पर्यटन परियोजनाओं की संभावनाओं की समीक्षा के लिए 15 दिन में दोबारा बैठक बुलाने और शीतकालीन पर्यटन पर पर्यटन सम्मेलन आयोजित करने को कहा। बैठक में पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
