उत्तराखंड में रोज निकल रहा 1,930 मीट्रिक टन कचरा, 1,800 मीट्रिक टन का हो रहा प्रसंस्करण
देहरादून, 9 सितम्बर। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड में शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। नए नियमों में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ सर्कुलर इकोनॉमी, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुनः उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है।
डॉ. धकाते बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने बताया कि एक अप्रैल 2026 से देशभर में लागू नए नियमों में कचरे को चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे—में अलग करने का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2016 के नियमों में कचरा पृथक्करण की तीन श्रेणियां निर्धारित थीं।
उन्होंने बताया कि 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पन्न करने के तीन मानकों में से किसी एक को पूरा करने वाला प्रतिष्ठान बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आएगा। ऐसे संस्थानों के पंजीकरण के साथ उनके कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
डॉ. धकाते ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 फरवरी 2026 को भोपाल म्युनिसिपल कॉरपोरेशन बनाम डॉ. सुभाष चंद्र पांडे मामले में दिए गए निर्देशों के क्रम में प्रदेश के प्रत्येक जिले में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं। इनके माध्यम से शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, डंपिंग साइट तथा पुराने जमा कचरे के निस्तारण की लगातार निगरानी की जा रही है। पुराने जमा कचरे के निस्तारण का कार्य दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग शत-प्रतिशत घर-घर कचरा संग्रहण किया जा रहा है। चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण को देखते हुए करीब 500 वाहनों में चार अलग-अलग खंड बनाने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही डिजिटल वाहन निगरानी प्रणाली लागू की गई है, जिससे कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि प्रदेश में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकल रहा है, जिसमें से लगभग 1,800 मीट्रिक टन का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का अलग से प्रसंस्करण किया जा रहा है। कचरा संग्रहण व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें करीब 480 ई-वाहन शामिल हैं।
राज्य में वर्तमान में 22 एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र, करीब 50 सामग्री पुनर्प्राप्ति केंद्र और 600 से अधिक अपशिष्ट कम्पोस्टर संचालित हैं। अधिकारियों ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सफल बनाने के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आम लोगों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुन्दिरयाल और शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे।
