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चिरबटिया कृषि महाविद्यालय: 12 साल बाद भी भवन निर्माण अधूरा, खंडहर में तब्दील हुई पुरानी बिल्डिंग

देहरादून, 23 मई। रुद्रप्रयाग और टिहरी जिले की सीमा पर स्थित चिरबटिया कृषि महाविद्यालय का भवन निर्माण कार्य 12 वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं हो सका है। करोड़ों की लागत से खड़ी की गई इमारतें देखरेख के अभाव और घटिया निर्माण के कारण अब खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं। परिसर तैयार न होने की वजह से कृषि महाविद्यालय के छात्रों की कक्षाएं वर्तमान में रानीचौरी परिसर (टिहरी) में संचालित की जा रही हैं।

इस बीच, रुद्रप्रयाग विधानसभा से पूर्व विधायक प्रत्याशी और युवा नेता मोहित डिमरी ने चिरबटिया पहुंचकर निर्माण कार्यों का जायजा लिया और इसे शासन-प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताया।

₹25 करोड़ की स्वीकृति और ₹5 करोड़ का बजट
वर्ष 2013 में चिरबटिया में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की गई थी। इसके लिए उद्यान विभाग की लगभग 8.3 हेक्टेयर खाली भूमि को चयनित कर महाविद्यालय के नाम आवंटित किया गया था। तत्कालीन प्रदेश सरकार ने इस महाविद्यालय के भवन निर्माण के लिए ₹25 करोड़ के बजट को मंजूरी दी थी, जिसमें से पहली किस्त के रूप में ₹5 करोड़ की धनराशि अवमुक्त की गई थी।
शासन ने टेंडर के माध्यम से उत्तर प्रदेश निर्माण निगम को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी। कार्यदायी संस्था ने यहाँ टाइप-2 व टाइप-3 आवासों सहित महाविद्यालय के मुख्य भवन का ढांचा खड़ा किया। लेकिन निर्माण कार्य इतना घटिया था कि आज यह पूरा भवन जर्जर होकर लावारिस हाल में पड़ा है।

रानीचौरी में चल रही हैं कक्षाएं
महाविद्यालय का अपना भवन न होने के कारण छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ के छात्रों को कृषि विज्ञान (B.Sc. Agriculture), बागवानी (Horticulture), मृदा विज्ञान (Soil Science), पादप रोग विज्ञान और कीट विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों की पढ़ाई के साथ-साथ पर्वतीय क्षेत्रों के अनुकूल कृषि अनुसंधान (Agricultural Research) की शिक्षा मिलनी थी। मगर बुनियादी ढांचा उपलब्ध न होने से यह कक्षाएं टिहरी जिले के रानीचौरी परिसर में चल रही हैं।

अब ₹7.26 करोड़ से बन रहा छात्रावास, उठे सवाल
लंबे समय बाद अब यहाँ छात्रावास (हॉस्टल) निर्माण के लिए ₹7 करोड़ 26 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है, जिससे वर्तमान में हॉस्टल का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि, इस आधे-अधूरे निर्माण पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं।

चिरबटिया पहुंचे युवा नेता मोहित डिमरी ने कहा कि जिस तरह पहली बिल्डिंग खस्ताहाल हो गई, वैसी ही स्थिति नए निर्माण कार्य की न हो जाए। उन्होंने कहा कि अभी यहाँ सिर्फ छात्रावास का निर्माण चल रहा है, जबकि नियम के अनुसार यहाँ प्रशासनिक भवन, हाई-टेक लैब, एकेडमिक ब्लॉक और शिक्षकों के आवास का निर्माण भी होना है। यह बाकी कार्य कब शुरू होंगे, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि सभी निर्माण कार्य एक साथ होते, तो जल्द कक्षाएं यहाँ संचालित होने की उम्मीद जगती। उन्होंने आशंका जताई कि टुकड़ों में बजट जारी कर कहीं सरकारी धन का दुरुपयोग तो नहीं किया जा रहा है।

मुख्य बिंदु..

  • साल 2013 में स्वीकृत हुआ प्रोजेक्ट आज भी अधूरा है।
  • बिना लैब और प्रशासनिक भवन के सिर्फ हॉस्टल बनने से छात्रों की पढ़ाई सुचारू होना मुश्किल है।
  • ₹5 करोड़ की लागत से बने पुराने ढांचे के जर्जर होने पर कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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