भारत में पहली बार मध्य-पूर्व क्षेत्रों में प्रचलित कैप्टागन नामक मादक पदार्थ जब्त
Captagon is a banned psychotropic substance that has become a major illicit drug in the Middle East. Originally developed in the 1960s as a prescription medicine containing fenethylline, it was once used to treat attention disorders and narcolepsy. Due to its highly addictive nature and harmful effects, it was prohibited in most countries. Today, illegal Captagon tablets are often produced in clandestine laboratories and may contain amphetamines, caffeine, or toxic chemicals. The drug is linked to smuggling networks, armed conflicts, and organized crime in countries such as Syria and Lebanon. Its abuse can cause insomnia, aggression, hallucinations, heart problems, and severe psychological dependence.
नयी दिल्ली, 16 मई ( PIB)। अंतरराष्ट्रीय सिंथेटिक ड्रग तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने ऑपरेशन RAGEPILL के तहत कैप्टागन की तस्करी में शामिल एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट/पाउडर जब्त किया गया तथा सिंडिकेट से जुड़े अवैध रूप से भारत में रह रहे एक सीरियाई नागरिक को गिरफ्तार किया गया। कैप्टागन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो एनडीपीएस अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के बहादुर और सतर्क योद्धाओं को ऑपरेशन RAGEPILL को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए बधाई दी। श्री शाह ने कहा कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के जरिए हमारी एजेंसियों ने कथित “जिहादी ड्रग” कैप्टागन को पहली बार जब्त किया है।
श्री अमित शाह ने X पर पोस्ट किया, ” मुझे यह बताते हुए ख़ुशी हो रही है कि ‘ऑपरेशन RAGEPILL’ के जरिए हमारी एजेंसियों ने पहली बार कथित ‘जिहादी ड्रग’ कैप्टागन की जब्ती की है, जिसका मूल्य ₹182 करोड़ है। मध्य-पूर्व जा रहे ड्रग के इस कंसाइनमेंट को पकड़ना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशीले पदार्थों के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति के दमकते उदाहरण हैं। मैं दोहराता हूँ कि भारत में आने वाली या हमारे देश को ट्रांजिट रूट के रूप में इस्तेमाल करके बाहर जाने वाली हर ग्राम ड्रग पर हम सख्ती से कार्रवाई करेंगे। एनसीबी के बहादुर और सतर्क योद्धाओं को बधाई।”
एक विदेशी ड्रग कानून प्रवर्तन एजेंसी से प्राप्त सूचना के आधार पर कि भारत का उपयोग कैप्टागन तस्करी के ट्रांजिट पॉइंट के रूप में किया जा रहा है, एनसीबी ने नई दिल्ली के नेब सराय क्षेत्र में एक मकान की पहचान की। 11 मई 2026 को मकान की तलाशी के दौरान एक चपाती कटिंग मशीन में छिपाकर रखी गई लगभग 31.5 किलोग्राम कैप्टागन टैबलेट बरामद की गई, जिसे जेद्दा, सऊदी अरब भेजा जाना था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि सीरियाई नागरिक 15.11.2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था, लेकिन उसका वीजा 12.01.2025 को समाप्त हो गया और वह अवैध रूप से यहाँ रह रहा था। उसने नेब सराय में मकान किराये पर लिया था। आरोपी से पूछताछ के बाद 14 मई 2026 को गुजरात के मुंद्रा स्थित कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन (CFS) में एक कंटेनर से लगभग 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किया गया। इस कंटेनर को भेड़ की ऊन से भरा हुआ बताकर सीरिया से आयात किया गया था। कंटेनर की गहन तलाशी के दौरान तीन बैगों में छिपाकर रखे गए 196.2 किलोग्राम कैप्टागन पाउडर बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब्त खेप को खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर सऊदी अरब और अन्य मध्य-पूर्व देशों में भेजा जाना था, जहां कैप्टागन का दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। ऑपरेशन RAGEPILL के तहत कुल लगभग 227.7 किलोग्राम कैप्टागन/ पाउडर जब्त किया गया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में अनुमानित कीमत लगभग ₹182 करोड़ आंकी गई है।
यह कार्रवाई भारत में कैप्टागन की पहली जब्ती है और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स द्वारा भारत को ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल करने की साजिश का पर्दाफाश करता है। यह ऑपरेशन दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय खुफिया साझेदारी और कानून प्रवर्तन सहयोग किस प्रकार विभिन्न देशों में सक्रिय अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क की पहचान, रोकथाम और ध्वस्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं तथा दुनिया भर की ड्रग प्रवर्तन एजेंसियां किस प्रकार मिलकर ऐसे नेटवर्क को खत्म कर सकती हैं। यह जब्ती हाल ही में मुंबई में एनसीबी द्वारा की गई एक अन्य बड़ी कार्रवाई के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जिसमें इक्वाडोर से आए कंटेनर में छिपाकर रखी गई 349 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली कोकीन बरामद की गई थी। यह इस बात को उजागर करता है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट द्वारा मादक पदार्थों की तस्करी के लिए व्यावसायिक कार्गो और कंटेनर आधारित व्यापार मार्गों का दुरुपयोग बढ़ रहा है।
एनसीबी ने खरीद के स्रोत, वित्तीय एवं हवाला लिंक, लॉजिस्टिक्स सुविधा प्रदाताओं, अंतरराष्ट्रीय रिसीवरों तथा ड्रग सिंडिकेट से जुड़े व्यापक अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पहचान के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। है। भारत एकीकृत कानूनों, खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, ड्रग सरगनाओं के प्रत्यर्पण तथा नार्को- आतंकवाद और ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ समन्वित कार्रवाई के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ब्यूरो भारत सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में सीमा पार सक्रिय अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। एनसीबी नागरिकों से अपील करता है कि वे मादक पदार्थों से संबंधित किसी भी सूचना को MANAS हेल्पलाइन (टोल-फ्री: 1933) पर साझा करें। सूचना देने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
