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उक्रांद अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत : जीरो से हीरो तक

 

– अनसूया प्रसाद मलासी

उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष पूरण सिंह कठैत आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। आम पहाडी़ परिवार की तरह आर्थिक तंगी से जूझते हुए पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए टेलीफोन विभाग में ₹6 की मजदूरी करके अपने जीवन की शुरूआत की और आज उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय अध्यक्ष हैं। बहुत रोचक और प्रेरणादायक है उनके जीवन का सफर…

पौड़ी जिले के कोट ब्लॉक में बमराडी़ गांव (जामणाखाल) निवासी 62 वर्षीय पूरण सिंह कठैत के पिता स्वर्गीय गोकल सिंह और मां स्व.गोदांबरी देवी हैं। आम पहाड़ी लोगों की तरह उनका बचपन भी आर्थिक तंगी से गुजरा और बड़े संकट में उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। माध्यमिक शिक्षा के बाद वे घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए टेलीफोन विभाग में छह रुपए प्रतिदिन की मजदूरी के हिसाब से लामबगड़ (चमोली) में काम करने लगे। अपनी लगन और मेहनत के बल पर उन्होंने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी और सन 1982 में विभाग में पक्के लाइनमैन की नौकरी प्राप्त करने में सफल रहे।

कहते हैं- होनहार विरवान के होत चिकने पात… कहावत को चरितार्थ करते हुए कम उम्र में ही वे टेलीफोन विभाग कर्मचारी यूनियन के ब्रांच सचिव चुने गए। इसके बाद उन्होंने जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा। नौकरी के साथ-साथ अध्ययन भी जारी रखा और विभागीय परीक्षाएं पास करते हुए प्रोन्नति प्राप्त करते रहे। टेलीफोन विभाग में काम करते हुए वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन में जुड़ गए और वर्ष 1994 के प्रचंड आंदोलन में 6 माह तक अवैतनिक रूप से राज्य प्राप्ति के आंदोलन में कार्य किया। श्री कठैत बीएसएनल कर्मचारी यूनियन के गढ़वाल मंडल के 6 वर्ष तक महासचिव रहे और सीनियर टीओ पद तक पहुँचे। 30 अप्रैल 2005 को उन्होंने विभाग से वीआरएस ले लिया। इसके एक सप्ताह बाद ही 6 मई 2005 को उन्होंने यूकेडी की सदस्यता ले ली।

उत्तराखंड क्रांति दल की गतिविधियों में वे सक्रिय रूप से कार्यरत रहे। वे दल के केंद्र संगठन मंत्री और तीन बार महामंत्री रहने के बाद गढ़वाल मंडल के प्रभारी भी रहे हैं।भरे-पूरे परिवार के साथ वे श्रीनगर में रहते हैं।

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